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  • Monday, 10 August 2026
युद्ध और तेल संकट का असर: भारत की विकास दर पर बढ़ा दबाव

युद्ध और तेल संकट का असर: भारत की विकास दर पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल बाजार में अस्थिरता का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे आम लोगों की क्रय शक्ति और उपभोक्ता खर्च पर असर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू मांग और निवेश गतिविधियां अर्थव्यवस्था को सहारा देती रहेंगी। फिच ने यह भी अनुमान जताया है कि वर्ष के अंत तक खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंच सकती है।

वैश्विक विकास दर के अनुमान में भी कटौती की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां और मौसम संबंधी जोखिम आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव बना सकते हैं।

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